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आम तौर पर, आँखें एक व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान को रखती हैं। इसके साथ ही, आंखों की सेहत को बनाए रखना किसी भी इंसान के लिए ज़िंदगी भर का काम होता है। दरअसल, आँखें शरीर के सभी महत्वपूर्ण आंखों में एक होती है, जो एक इंसान को दुनिया की सभी खूबसूरत चीजों को देखने में मदद करती हैं। आपको बता दें, कि हमारी आंखों में समस्यायों का खतरा खानपान में गड़बड़ी, खराब जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के कारण काफी ज्यादा बढ़ सकता है। जैसे कि आंखों में इंट्राओक्युलर प्रेशर जैसी समस्या होना। इंट्राओक्युलर प्रेशर (IOP) जैसी समस्या को आंखों में दबाव भी कहा जाता है, जो आम तौर पर, आंखों की बीमारियों का एक प्रमुख कारण होता है। एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारी आंखों का सेहतमंद होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, ज्यादातर लोगों में इंट्राओक्युलर प्रेशर (IOP) जैसी समस्या के बारे में, जानकारी न होने की वजह से इस पर उतना ध्यान नहीं देते हैं। आम तौर पर, अपनी हर बीमारी पर महत्वपूर्ण ध्यान देना काफी ज्यादा जरूरी होता है। आपको बता दें कि अगर आपकी आंखों का दबाव असंतुलित हो जाता है, तो आपको इसकी वजह से कई तरह की गंभीर समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कई लोग इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, आखिर आंखों का इंट्राऑकुलर प्रेशर क्या होता है और इसके कारण, लक्षण और इसको कंट्रोल करने के कौन से तरीके हो सकते हैं?
आंखों का इंट्राऑकुलर प्रेशर क्या होता है?
दरअसल, आंखों का इंट्राऑकुलर प्रेशर एक तरह की समस्या होती है। जिससे आज के समय में कई लोग पीड़ित हैं। डॉक्टर के अनुसार, आँखों के अंदर एक तरल पदार्थ होता है, जिसको एक्वस ह्यूमर के नाम से जाना जाता है। आपको बता दे, कि यह तरल पदार्थ लगातार आँखों में बनता है और लगातार आँखों से बाहर निकलता भी रहता है। आम तौर पर, जब इस तरल पदार्थ की मात्रा आँखों में काफी जयादा बढ़ जाती है, या फिर यह उसी आम गती से बाहर नहीं निकल पाता है, तो आँखों में दबाव बढ़ता है, जिसे आंखों का इंट्राओकुलर प्रेशर कहा जाता है।
आँखों में इंट्राऑकुलर प्रेशर हाई होने के कारण
आम तौर पर, आंखों का इंट्राऑकुलर प्रेशर कई कारणों की वजह से हो सकता है, जिसमें शामिल हो सकते हैं, जैसे कि
1. बढ़ती उम्र: दरअसल, लोगों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ आंखों के अंदर मौजूद तरल पदार्थ के निकलने में भी काफी ज्यादा कमी आती है।
2. आनुवंशिक कारण: परिवार में पहले से ही ग्लूकोमा जैसी समस्या का इतिहास होने की वजह से खतरा बढ़ जाता है।
3. दवाएं: दरअसल, कुछ दवाओं का सेवन आंखों के दबाव को बढ़ा सकती हैं।
आँखों में इंट्राऑकुलर प्रेशर हाई होने के लक्षण
आपको बता दें, कि आँखों में इंट्राओकुलर प्रेशर हाई होने पर, किसी भी तरह का कोई ख़ास लक्षण नज़र नहीं आता है। इस तरह की समस्या का पता लगाने के लिए रोजाना आंखों की जांच करना महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, कुछ ही मामलों में, इसके हाई होने पर इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि
1. धुंधली या फिर कमजोर नजर का होना।
2. काफी ज्यादा सिरदर्द होना।
3. मतली होना
4. आंखों में दर्द होना।
5. इंद्रधनुष जैसा रंग दिखाई देना।
इंट्राऑकुलर प्रेशर को कंट्रोल करने के तरीके
आम तौर पर, इंट्राऑकुलर प्रेशर जैसी समस्या को कंट्रोल करने के लिए इन चीजों का ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, जैसे कि
1. नियमित अपनी आंखों की जांच करवाना।
2. डॉक्टर द्वारा आंखों में डालने वाली दवाएं, गोली या फिर अन्य दवाओं का सेवन करना।
3. लेजर उपचार करवाना।
4. इसके गंभीर मामलों में सर्जरी करवाना।
5. स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना।
निष्कर्ष
आंखों का इंट्राऑकुलर प्रेशर एक तरह की समस्या है और इससे बचने के लिए, अपनी आँखों को सेहतमंद रखना जरूरी होता है। इसके लिए स्मोकिंग, ज्यादा देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बचें। इसके अलावा, समय-समय पर आंखों की जांच कराएं। अगर आपको भी आँखों से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल में जाकर इसके इलाज के बारे में इसके विशेषज्ञों से जानकारी ले सकते हैं।
